आजकल महिलाओं में एक नाम सबसे ज़्यादा चर्चा में रहता है—PCOS, यानी Polycystic Ovary Syndrome। यह कोई नई समस्या नहीं है, लेकिन तेज़ रफ्तार ज़िंदगी, अनियमित दिनचर्या और बढ़ते तनाव ने इसे पहले से अधिक आम बना दिया है। कई लड़कियाँ इसे शुरू में “हॉर्मोनल गड़बड़ी” समझकर नज़रअंदाज़ कर देती हैं, लेकिन समय रहते सही जानकारी और देखभाल बड़े बदलाव ला सकती है।
PCOS क्या है?
PCOS एक ऐसी स्थिति है जिसमें महिलाओं के अंडाशय (Ovaries) में छोटी-छोटी सिस्ट बनने लगती हैं। ये सिस्ट तरल पदार्थ से भरी होती हैं और अक्सर तब बनती हैं जब ओवरी में अंडा पूरी तरह विकसित नहीं हो पाता।
इसका सीधा असर पीरियड्स, वजन, त्वचा और प्रजनन क्षमता पर पड़ सकता है।
साधारण भाषा में कहें तो—
PCOS शरीर में हॉर्मोन का संतुलन बिगड़ने की स्थिति है।
PCOS होने के मुख्य कारण
हालाँकि PCOS का एक ही कारण तय नहीं है, लेकिन शोध और चिकित्सकीय अनुभव कुछ बातें स्पष्ट बताते हैं:
1. इंसुलिन रेज़िस्टेंस
खून में शुगर नियंत्रित रखने के लिए इंसुलिन ज़रूरी है। जब शरीर इंसुलिन को सही तरह इस्तेमाल नहीं कर पाता, तो ओवरीज़ अधिक पुरुष हॉर्मोन (एंड्रोजन) बनाने लगती हैं।
2. जेनेटिक फैक्टर
अगर माँ, बहन या नज़दीकी रिश्तेदारों को PCOS रहा है, तो इसकी संभावना बढ़ जाती है।
3. असंतुलित हॉर्मोन
एंड्रोजन बढ़ने से पीरियड्स अनियमित होते हैं और चेहरे पर बाल, मुहांसे जैसी समस्याएँ बढ़ सकती हैं।
4. तनाव और अनियमित Lifestyle
आज की भागदौड़, नींद की कमी, जंक फूड, देर रात तक जागना — ये सब PCOS की जड़ें और गहराई तक ले जाते हैं।
PCOS के आम लक्षण
PCOS हर व्यक्ति में अलग तरीके से दिखाई देता है, पर कुछ लक्षण अक्सर देखने को मिलते हैं:
- पीरियड्स का लेट होना या कई महीनों तक न आना
- चेहरे, ठोड़ी या पेट पर अनचाहे बाल
- चेहरे पर बार-बार एक्ने होना
- वजन तेजी से बढ़ना
- बालों का झड़ना
- मूड स्विंग्स या चिड़चिड़ापन
- गर्भधारण में कठिनाई
अगर ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।

PCOS का इलाज (Treatment)
PCOS का एक ही “परमानेंट इलाज” नहीं है, लेकिन सही देखभाल से इसे पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।
1. डॉक्टर की सलाह अनुसार दवाइयाँ
अक्सर डॉक्टर हॉर्मोन बैलेंस करने वाली दवाएँ, इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाने वाली मेडिसिन या पीरियड्स नियमित करने वाली दवाएँ लिखते हैं।
2. Diet में बदलाव
PCOS में खाना ही आधा इलाज माना जाता है:
- कम शुगर और कम मैदे वाली चीजें
- Whole grains
- हरी सब्जियाँ
- Seasonal fruits
- Healthy fats जैसे—अलसी, अखरोट, ओलिव ऑयल
3. नियमित एक्सरसाइज
रोज़ 30–40 मिनट वॉक, योग या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग PCOS के लिए बेहद फायदेमंद है।
4. तनाव कम करना
तनाव बढ़ता है तो हॉर्मोन बिगड़ते हैं।
योग, ध्यान, हल्की स्ट्रेचिंग और पर्याप्त नींद बहुत जरूरी है।
PCOS और Pregnancy
बहुत सी महिलाओं का पहला डर यही होता है—“क्या PCOS होने से माँ बनना मुश्किल हो जाएगा?”
सच यह है कि PCOS होने पर भी गर्भधारण बिल्कुल संभव है।
बस डॉक्टर की निगरानी, सही पोषण और नियमित जीवनशैली अपनाने से सफलता दर काफी बढ़ जाती है।
PCOS में Ayurveda की भूमिका
आयुर्वेद PCOS को संतुलित दोषों की समस्या मानकर इलाज करता है।
यह ध्यान रखा जाता है कि शरीर का पाचन (Agni), नींद, और हॉर्मोन सिस्टम संतुलित रहे।
- त्रिफला
- अशोक चूर्ण
- शतावरी
- लोध्र
- मेथी
जैसी जड़ी-बूटियाँ सहायक मानी जाती हैं (लेकिन डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह ज़रूर लें)।
PCOS को कंट्रोल करने के आसान घरेलू उपाय
- सुबह गुनगुना पानी
- मेथी के दाने रातभर भिगोकर खाना
- दालचीनी वाली चाय
- हरी पत्तेदार सब्जियाँ
- दिन में 30 मिनट तेज़ वॉक
छोटे-छोटे बदलाव भी बड़े परिणाम ला सकते हैं।
PCOS से जुड़ी आम गलतफहमियाँ
❌ “PCOS होने पर बच्चे नहीं हो सकते।”
✔ अधिकांश महिलाएँ सफलतापूर्वक गर्भधारण करती हैं।
❌ “वजन बढ़ना सिर्फ खाने की वजह से होता है।”
✔ PCOS खुद वजन बढ़ाने की प्रवृत्ति बढ़ाता है।
❌ “ये सिर्फ एक पीरियड की समस्या है।”
✔ यह एक हॉर्मोनल असंतुलन है जो शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित करता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
PCOS कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक हॉर्मोनल कंडीशन है जिसे सही जानकारी, बेहतर खान-पान और संतुलित जीवनशैली से पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।
जल्दी पहचान और समय रहते इलाज से यह आपकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर ज़रा भी असर नहीं डालता।


